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सेवायें:

बाल विकास सेवा एवं पुष्त्तहार विभाग द्वारा अनुपूरक पोषाहार, स्वास्थ्य प्रतिरक्षण (टीकाकरण), स्वास्थ्य जाँच, पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा, पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा, स्कूल पूर्व शिक्षा, निर्देशन एवं संदर्भ सेवा प्रदान की जाती है।

सेवाओं का विवरण
1. अनुपूरक पोषाहार

इस कार्यक्रम के अन्तर्गत 07 माह से 06 वर्ष के कुपोषित तथा अति कुपोषित बच्चों, गर्भवती तथा धात्री माताओं एव किशोरी बालिकाओं को कुपोषण दूर करने के उद्येश्य से अनुपूरक पुष्टाहार उपलब्ध कराया जाता है। विकेन्द्रीकृत व्यवस्था के अन्तर्गत वर्तमान समय में पूरे प्रदेश की 897 परियोजनाओं में आंगनवाड़ी केन्द्रों पर मातृ समितियों के माध्यम से 03 से 06 वर्ष आयु के बच्चों को गरम पका-पकाया खाना (हाट कुकड फुड) उपलब्ध कराया जा रहा है।

सामान्य बच्चों को कम से कम 500 कैलोरी ऊर्जा और 12-15 ग्राम प्रोटीन, कुपोषित बच्चों को कम से कम 300 कैलोरी ऊर्जा और 08-10 ग्राम प्रोटीन, अति कुपोषित बच्चों, किशोरियों, गर्भवती तथा धात्री महिलाओं के लिये 600 कैलोरी ऊर्जा तथा 20 से 25 ग्राम प्रोटीन प्रतिदिन अनुपूरक पुष्टाहार में प्रतिदिन उपलब्ध कराने का मानक तैयार किया गया है।

2. स्वास्थ्य प्रतिरक्षण (टीकाकरण)

विभाग द्वारा स्वास्थ्य विभाग की सहायता से परियोजना क्षेत्र में आने वाले 01 वर्ष के बच्चों तथा गर्भवती महिलाओं को टीके लगवाये जाते हैं एवं आंगनवाड़ी कार्यकत्री, गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों की स्वास्थ्य जाॅच क्षेत्रीय ए0एन0एम0 के माध्यम से कराती है।

3. स्वास्थ्य जाँच

रोगों के निवारण तथा प्राथमिक उपचार के लिये आंगनवाड़ी कार्यकत्री द्वारा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र एवं स्वास्थ्य विभाग की स्थानीय स्तर पर कार्यरत ए0एन0एम0 से समन्वय कर आवश्यक दवाइयाँ दिलाने की व्यवस्था करती है।

4. पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा

आंगनवाड़ी कार्यकत्री द्वारा गृह सम्पर्क के दौरान तथा आंगनवाड़ी केन्द्रों पर महिलाओं को बच्चों के लालन पालन, स्वास्थ्य, सफाई एवं सामान्य बीमारियों के सम्बन्ध में शिक्षित किया जाता है।.

5. स्कूल पूर्व शिक्षा

03 से 06 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को स्कूल पूर्व शिक्षा प्रदान की जाती है। यह समेकित बाल विकास परियोजना का महत्वपूर्ण अंग है। बच्चों के प्राथमिक विद्यालय में जाने से पहले आंगनवाड़ी शिक्षा प्रक्रिया का पहला चरण है। इसका उद्येश्य बच्चों की शारीरिक, नैतिक और सामाजिक विकास के साथ ही उनकी भाषा एवं बुद्वि का विकास करना है।

6. निर्देशन एवं संदर्भ सेवा

आंगनवाड़ी कार्यकत्री स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की सहायता से क्षेत्र के अन्तर्गत आने वाले बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य सेवायें हेतु संदर्भित करती हैं।



योजनायें:
1. अनुपूरक पोषाहार

उपलब्ध कराये जा रहे अनुपूरक पुष्टाहार तथा उससे प्राप्त होने वाले पोषक तत्वों का विवरण निम्नवत हैः-

  •    07 माह से 3 वर्ष तक की आयु के बच्चों को टेक-होम राशन के रूप में एनर्जी डेन्स वीनिंग फूड, डेन्स मीठा दलिया एवं एनर्जी डेन्स नमकीन दलिया उपलब्ध कराया जाता है जिससे इन्हे प्रतिदिन 500 कैलोरी तथा 14 ग्राम प्रोटीन प्राप्त होती है।

  •    3 वर्ष से 06 वर्ष तक की आयु के बच्चों को मार्निग स्नैक के रूप में एनर्जी डेन्स मीठा दलिया, एनर्जी डेन्स नमकीन दलिया एवं एनर्जी लडडू प्रीमिक्स जिससे इन्हे प्रतिदिन 500 कैलोरी तथा 15 ग्राम प्रोटीन प्राप्त होती है।

  •    गर्भवती महिलाओं एवं धात्री माताओं को टेक हेाम राशन के रूप में एनर्जी डेन्स मीठा दलिया, एनर्जी डेन्स नमकीन दलिया एवं एनर्जी डेन्स लडडू प्रीमिक्स उपलब्ध कराया जाता है जिससे इन्हे प्रतिदिन 600 कैलोरी तथा 18 ग्राम प्रोटीन प्राप्त होती है।

लाभार्थियों को उपलब्ध कराये जा रहे अनुपूरक पुष्टाहार का संक्षिप्त विवरण
क्रम सं0 लाभार्थी रेसिपी प्रति लाभार्थी प्रतिदिन(मात्रा ग्राम में) पैकिजिंग की मात्रा (किग्रा0 में)
1 06 माह से 03 वर्ष आयु डेन्स वीनिंग फूड 125 ग्राम की दर से माह में 09 दिन-1125 1.125
2 तक के बच्चे (टेक होम इनर्जी डेन्स मीठा दलिया 120 ग्राम की दर से माह में 08 दिन-960 0.960
3 राशन के रूप में) इनर्जी डेन्स नमकीन दलिया 120 ग्राम की दर से माह में 08 दिन-960 0.960
4 गर्भवती महिलाये एवं इनर्जी डेन्स लड्डू प्रीमिक्स 150 ग्राम की दर से माह में 09 दिन-1350 1.350
5 धात्री मातायें इनर्जी डेन्स मीठा दलिया 150 ग्राम की दर से माह में 08 दिन-1200 1.200
6 टेक होम राशन के रूप में इनर्जी डेन्स नमकीन दलिया 140 ग्राम की दर से माह में 08 दिन-1120 1.120
7 03 वर्ष से 06 इनर्जी डेन्स लड्डू प्रीमिक्स 50 ग्राम की दर से माह में 09 दिन-450 1.000
8 वर्ष के बच्चे इनर्जी डेन्स मीठा दलिया 50 ग्राम की दर से माह में 08 दिन-400 1.000
9 मार्निंग स्नैक के रूप में) इनर्जी डेन्स नमकीन दलिया 50 ग्राम की दर से माह में 08 दिन-400 1.000
लाभार्थियों को वर्ष में 300 दिन/माह में कम से कम 25 दिन का पोषाहार दिये जाने की व्यवस्था है।

2. हॉट कुक्ड फूड

  •    योजना के अन्तर्गत 03 वर्ष से 06 आयु के समस्त बच्चों को आंगनवाडी केन्द्र पर दैनिक रूप से प्रातः मार्निंग स्नैक तथा मध्यान्ह में हॉट कुक्ड फूड वितरण की व्यवस्था है।

  •    3 भारत सरकार द्वारा 03 वर्ष से 06 वर्ष आयु के बच्चों को अनुपूरक पुष्टाहार दिये जाने के लिये प्रति लाभार्थी रू0 8.00 प्रतिदिन अनुमन्य है इस धनराशि में से रू0 3.50 प्रति लाभार्थी मर्निंग स्नैक पर तथा रू0 4.50 हॉट कुक्ड फूड पर व्यय किये जाने की व्यवस्था है।

  •   मार्निंग स्नैक के रूप में दिये जाने वाले पोषाहार यथा- एनर्जी डेन्स मीठा दलिया, एनर्जी डेन्स नमकीन दलिया एवं एनर्जी डेन्स लडडू प्रीमिक्स से 200 कैलोरी एवं 07 ग्राम प्रोटीन प्राप्त होगी तथा हॉट कुक्ड फूड योजना के अन्तर्गत मिड-डे-मिल योजना की रेसिपी के अनुसार भोजन उपलब्ध कराया जाता है इससे लाभार्थियों को 300 कैलोरी व 07 से 08 ग्राम प्रोटीन प्राप्त होगी। प्रदेश के 54 जनपदों के आंगनवाड़ी केन्द्रों को प्राथमिक विद्यालय/उच्च प्राथमिक विद्यालयों से सम्बद्व करके मध्यान्ह भोजन योजना के साथ ही इन केन्द्रों का भोजन तैयार कराकर आंगनवाड़ी केन्द्रों पर कराये जाने की व्यवस्था है। शेष 21 जनपदों के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में आंगनवाड़ी केन्द्रों पर स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से हॉट कुक्ड फूड योजना संचालित किये जाने का निर्णय लिया गया है।

  •    हॉट कुक्ड फूड में प्रयुक्त होने वाले कच्चे खाद्यान एवं अन्य सामग्रियों आदि का क्रय ग्राम प्रधान/सभासद/स्वयं सहायता समूह के अध्यक्ष व आंगनवाड़ी कार्यकत्री द्वारा किया जाता है।

3. किशोरियों के लिए योजना (एस0ए0जी0)

  •    प्रदेश के 22 जनपदों में किशोरी बालिकाओं (11 से 14 वर्ष आयु की स्कूल न जाने वाली) को टेक-होम राशन के रूप में एनर्जी डेन्स मीठा दलिया, एनर्जी डेन्स नमकीन दलिया एवं एनर्जी डेन्स लड्डू प्रीमिक्स उपलब्ध कराया जाता है तथा प्रदेश के शेष 53 जनपदों में किशोरी बालिकाओं (11 से 14 वर्ष आयु की स्कूल न जाने वाली) को नैफेड द्वारा आपूर्तित मोटे अनाज के रूप ज्वार, देशी काला चना, मसूर दाल तथा पी0सी0डी0एफ0 द्वारा आपूर्तित देशी घी उपलब्ध कराया जाता है।

  •    किशोरी बालिकाओं (11 से 14 वर्ष आयु की स्कूल न जाने वाली) को गैर पोषण मद के अन्तर्गत प्रशिक्षित करने हेतु ऑगनबाड़ी केन्द्रों पर वीरांगना दलों का गठन कर सखी सहेलियों को प्रशिक्षित किया जाता है।