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महिलाओं एवं शिशुओं के कल्याणार्थ विभिन्न विभागों द्वारा संचालित कार्यक्रमों के समन्वय एवं अनुश्रवण करने तथा महिलाओं को देश की मुख्य विकास की धारा में सम्मिलित करने, उनको सामाजिक एवं आर्थिक रूप से आत्म निर्भर बनाने के दृष्टिगत बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग की स्थापना की गयी है। देश के बच्चों का भविष्य 06 वर्ष के बच्चों में निहित है। आज के बच्चे कल के नागरिक है, इसलिये यह आवश्यक है कि बच्चों के सर्वांगीण विकास की आवश्यक्ता है। इसके लिये बच्चे के स्वास्थ्य, शिक्षा तथा पोषण के लिये समुचित व्यवस्था किये जाने की आवश्यकता है।

07 माह से 03 वर्ष के शिशु, 03 से 06 वर्ष तक के बच्चे, गर्भवती महिला, धात्री मातायें एवं किशोरी बालिकायें

  हमारी गतिविधियां:-
1- नवजात शिशुओं की देखभाल एवं प्रारम्भिक शिक्षा 2- स्वास्थ्य प्रतिरक्षण (टीकाकरण) 3-स्वास्थ्य जॉच 4- स्वास्थ्य एवं पोषण शिक्षा 5- दिशा निर्देशन एवं सन्दर्भन सेवायें

  हमारी सेवायें:-
1- अनुपूरक पोषाहार 2- स्वास्थ्य प्रतिरक्षण (टीकाकरण) 3-स्वास्थ्य जॉच 4-पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा 5- स्कूल पूर्व शिक्षा 6- दिशा निर्देशन एवं सन्दर्भन सेवायें

बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग, 06 वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं एवं किशोरी बालिकाओं के स्वास्थ्य पोषण तथा शैक्षणिक स्तर में गुणात्क सुधार लाने के लिये प्रतिबद्ध है।

इसके लिये भारत सरकार द्वारा प्रदेश को अवश्यक वित्तीय संसाधन तथा अन्य प्रकार के सहयोग प्रदान करती है, जिसके द्वारा बच्चों के सर्वांगीण विकास, अच्छे स्वास्थ्य, कुपोषण को दूर करने के लिये अनुपूरक पोषाहार तथा स्कूल पूर्व शिक्षा ग्रहण करने के लिये विभन्न कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं। साथ ही साथ किशोरी बालिकाओं को स्वास्थ्य शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराकर उनको सामाजिक एवं आर्थिक रूप से संसंगत बनाने हेतु कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं। इसके अतरिक्त विश्व बैंक, केयर, विश्व खाद्य कार्यक्रम तथा यूनिसेफ द्वारा भी समय-समय पर विभिन्न प्रकार से सहायता तथा मार्ग दर्शन प्रदान किया जाता है।

  कार्यक्रम के मुख्य उद्येश्य:-

1- बच्चों के शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक विकास की नींव डालना।
2- 06 वर्ष से छोटे बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण में सुधार लाना।
3- मृत्युदर, अस्वस्थता, कुपोषण एवं स्कूल की पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों की दर में कमी लाना।
4- बाल विकास को बढ़ावा देने हेतु विभिन्न विभागों के बीच नीति निर्धारण एवं कार्यक्रम कियान्वयन हेतु हर स्तर पर उचित समन्वय स्थापित करना।
5- उचित सामुदायिक शिक्षा के माध्यम से माताओं की क्षमताओं का विकास करना, जिससे वे बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण, विकास की आवश्यक्ताओं को पहचान सकें, और उचित निर्णय ले सके और देखभाल कर सकें।

उपरोक्त उद्येश्य की पूर्ति हेतु 150-400 की आबादी पर एक मिनी आंगनवाड़ी केन्द्र तथा 400-800 की आबादी पर एक आंगनवाड़ी केन्द्र की स्थापना की जाती है।

  हमारा लक्ष्य:-

1- अति कुपोषित एवं आंशिक रूप से कुपोषित बच्चों की संख्या में कमी लाना।
2- शिशु मृत्यु दर में कमी लाना।
3- कम वजन वाले नवजात शिशुओं की संख्या में कमी लाना।

  विभाग की गतिविधियों का संक्षिप्त विवरणः-

1- अनुपूरक पोषाहार:- इस कार्यक्रम के अन्तर्गत 07 माह से 06 वर्ष के कुपोषित तथा अति कुपोषित बच्चों, गर्भवती तथा धात्री माताओं एव किशोरी बालिकाओं को कुपोषण दूर करने के उद्येश्य से अनुपूरक पुष्टाहार उपलब्ध कराया जाता है। विकेन्द्रीकृत व्यवस्था के अन्तर्गत वर्तमान समय में पूरे प्रदेश की 897 परियोजनाओं में आंगनवाड़ी केन्द्रों पर मातृ समितियों के माध्यम से 03 से 06 वर्ष आयु के बच्चों को गरम पका-पकाया खाना (हाट कुकड फुड) उपलब्ध कराया जा रहा है।

सामान्य बच्चों को कम से कम 500 कैलोरी ऊर्जा और 12-15 ग्राम प्रोटीन, कुपोषित बच्चों को कम से कम 300 कैलोरी ऊर्जा और 08-10 ग्राम प्रोटीन, अति कुपोषित बच्चों, किशोरियों, गर्भवती तथा धात्री महिलाओं के लिये 600 कैलोरी ऊर्जा तथा 20 से 25 ग्राम प्रोटीन प्रतिदिन अनुपूरक पुष्टाहार में प्रतिदिन उपलब्ध कराने का मानक तैयार किया गया है।


2- स्वास्थ्य प्रतिरक्षण (टीकाकरण):- विभाग द्वारा स्वास्थ्य विभाग की सहायता से परियोजना क्षेत्र में आने वाले 01 वर्ष के बच्चों तथा गर्भवती महिलाओं को टीके लगवाये जाते हैं एवं आंगनवाड़ी कार्यकत्री, गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों की स्वास्थ्य जॉच क्षेत्रीय ए0एन0एम0 के माध्यम से कराती है।


3- स्वास्थ्य जाँच:- रोगों के निवारण तथा प्राथमिक उपचार के लिये आंगनवाड़ी कार्यकत्री द्वारा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र एवं स्वास्थ्य विभाग की स्थानीय स्तर पर कार्यरत ए0एन0एम0 से समन्वय कर आवश्यक दवाइयाँ दिलाने की व्यवस्था करती है।


4- पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा:- रोगों के निवारण तथा प्राथमिक उपचार के लिये आंगनवाड़ी कार्यकत्री द्वारा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र एवं स्वास्थ्य विभाग की स्थानीय स्तर पर कार्यरत ए0एन0एम0 से समन्वय कर आवश्यक दवाइयाँ दिलाने की व्यवस्था करती है।


5- स्कूल पूर्व शिक्षा:-03 से 06 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को स्कूल पूर्व शिक्षा प्रदान की जाती है। यह समेकित बाल विकास परियोजना का महत्वपूर्ण अंग है। बच्चों के प्राथमिक विद्यालय में जाने से पहले आंगनवाड़ी शिक्षा प्रक्रिया का पहला चरण है। इसका उद्येश्य बच्चों की शारीरिक, नैतिक और सामाजिक विकास के साथ ही उनकी भाषा एवं बुद्वि का विकास करना है।


6- निर्देशन एवं संदर्भ सेवा:-आंगनवाड़ी कार्यकत्री स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की सहायता से क्षेत्र के अन्तर्गत आने वाले बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य सेवायें हेतु संदर्भित करती हैं।


  विभाग द्वारा संचालित योजनाएं :-

1- किशोरी शक्ति योजना:- इस योजना के अन्तर्गत किशोरी बालिकाओं को प्रजनन, स्वास्थ्य समस्याओं एवं अधिकारों के प्रति जागरुक करना, पोषण सम्बन्धी रक्ताल्पता को कम करना, किशोरी बालिकाओं उचित जानकारी एवं सूचनाओं द्वारा उनके शरीर एवं स्वयं के बारे में जागरूक करना स्वरोजगार के अवसर के उद्देश्य से 03 दिवसीय स्वास्थ्य एवं पोषण हेतु विशेष प्रशिक्षण एवं 60 दिवसीय तकनीकी व्यावहारिक प्रशिक्षण जैसे - सिलाई, कढ़ाई, बुनाई, अचार मुरब्बा आदि। यह योजना प्रदेश के 50 जनपदों की 602 परियोजनाओं में लागू है।